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नियमावली

१.संस्था का नाम :- राजपूत नि:स्वार्थ सेवा संघ

२.संस्था का पंजीकरण कार्यालय :- ४-गोल्डन होम्स द्वारा श्री आर.पी.सिंह V.I.P. क्लब रायपुर

३.संस्था का प्रशासनिक कार्य क्षेत्र :- सम्पूर्ण छ.ग.

४.(अ) परिभाषाएँ

१.इस सविधान में प्रयुक्त शब्द 'अधिनियम और नियम' से तात्पर्य छ.ग. सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम १९७३ संशोधन १९९८ द्वारा समय समय पर यथा शंशोधित हुआ तथा इसके अधीन बनाये गये नियमों से है ।
२.शासन से तात्पर्य छ.ग. शासन वाणिज्य एवं उद्योग विभाग से है ।
३.पंजीयक से तात्पर्य पंजीयक फार्म एवं संस्थाएं छ.ग. या पंजीयन प्राधिकारी से है ।
४.सदस्य से तात्पर्य ऐसा व्यक्ति जिसने इस संविधान में उल्लेखित सदस्यता सम्बन्धी समस्त शर्तों एवं प्रक्रियाओं को पूर्ण करलिया हो।
५.संस्था से तात्पर्य राजपूत नि:स्वार्थ सेवा संघ से है।
६.संविधान से तात्पर्य इस संस्था के संविधान से है।

४(ब)संस्था का उद्देश्य :-
अ)संस्था द्वारा छ.ग. में फैली छोटी /बड़ी ईकाइयों/सामाजिक संस्थाओं को गठित कर एक इकाई टेल प्रांतीय संस्था का प्रचार प्रसार करना ।
ब) संस्था के द्वारा राजपूत भाई बंधुओं का सामूहिक विवाह प्रथा का प्रचलन चलाने पर सहयोग करना ।
स) संस्था द्वारा शक्ति के रूप में पूजित माँ दुर्गा का उत्सव एवं दशहरा प्रतिवर्ष मनाना ।
द)संस्था द्वारा गरीबी रेखा से निचे परिवार की कन्याओं का विवाह खर्च उठाना ।
क)संस्था का उद्देश्य की सभी राजपूत बंधुओं का अपना स्वयं का आवास हो की पूर्ति के लिए प्रयास करना ।
ख)संस्था द्वारा कम आय वाले राजपूत परिवार को संस्था के द्वारा संचालित गतिविधिओं में नि:शुल्क
सहयोग देने एवं स्त्री शिक्षा को बढावा देना।
ग)राजपूतों का व्यक्तिगत हित सुरक्षित रहे उसके लिए शासन से सहयोग प्राप्त करना ।
घ)राजपूतों के द्वारा अन्य समाजों के भाई बंधुओं से प्रेमभावना बढाने हेतु उचित कदम उठाना ।
च)राजपूत बुर्जगवार सम्मानित सदस्यों को सम्मानित जीवन व्यतीत करने व्यवस्था करवाना व आदर दिलवाना ।
फ)संस्था के उद्देश्य छ.ग. में सभागृह,शादी विवाह के कार्यक्रम का सञ्चालन ,शिक्षण संसथान का सञ्चालन ,हास्पिटल का सञ्चालन ,धर्मशाला का सञ्चालन किया जावेगा ।
सदस्यों का प्रकार
५.(अ)विलोपित किया गया ।
५.(ब)विलोपित ।
५.(अ)सम्मानित सदस्य :-
समाज के वरिष्ठ एवं वशिष्ठ व्यक्तियों में से अधिकतम २० व्यक्तियों /महिलाओं को संस्था के सम्मानित सदस्य के पद पर प्रबंधकारिणी के निर्णय से मनोनित किया जा सकेगा किन्तु उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा इनसे सदस्यता शुल्क नहीं लिया जावेगा ।
५.(ब)आजीवन सदस्यता :-
संस्था का आजीवन सदाशयता शुल्क वर्त्तमान में १०००००/-एक लाख रूपए होगा ।जो सदस्यता ग्रहण करते समय नगद/ड्राफ्ट डे होगा ।बाद में कोई सदस्य निर्धारित राशी जमा आजीवन सदस्य बन सकता है।इस हेतु कार्यकारिणी का नियमानुसार अनुमोदन आवश्यक होगा । आजीवन सदस्यों की अधिकतम संख्या ५१ होगी ।

५.(स)सक्रीय सदस्य :-
साधारण सदस्यों में से जिसके द्वारा ५ वर्षों तक नियमित रूप से निर्धारित अवधी में जिसमे शुल्क जमा किया हो ।
५.(द)विलोपित
५.(इ)साधारण सदस्य :-संस्था के साधारण सदस्य जो दान के रूप में १००००/-दस हज़ार रूपए देंगे उन्हें पञ्च वर्ष के लिए सदस्य बनाया जावेगा और उन्हें नियमावली की कदिका ६ के अनुसार संस्था की सदस्यता प्रबंधकारिणी मान्य करेगी ।
संस्था के साधारण सदस्य मासिक २०/- बीस रूपए अथवा वार्षिक रूप से २४०/-रूपए देकर साधारण सदस्य बन सकतें है।उन्हें नियमावली की कदिका ६ के अनुसार संस्था की सदस्यता प्रबंधकारिणी मान्य करेगी । यदि सदस्य ने लगातार तिन माह तक सदस्यता शुल्क नहीं दिया तो अगले माह १००/-अतिरिक्त देगा तभी सदस्यता नियमित रहेगी अन्यथा जिस माह तक शुल्क दिया उसके बाद सदस्यता समाप्त हो जावेगी ।

५.(फ)पंजीयन शुल्क :-प्रत्येक व्यक्ति को सदस्यता ग्रहण करने के पूर्व १०/-का पंजीयन शुल्क देना होगा ।आवेदन अस्वीकृत होने पर सदस्यता शुल्क की राशी वापस की जावेगी परन्तु पंजीयन शुल्क की राशी वापस नहीं होगी तथा आवेदन स्वीकृत होने पर

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